Tuesday, 8 September 2026

सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part-3)


सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 584)

> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*ख़ोशा दरख़्त से उतर पड़ा :* हज़रते अब्दुल्लाह बिन अब्बास رضى الله تعالیٰ عنهما का बयान है कि एक आ'राबी बारगाहे रिसालत में हाज़िर हुवा और उस ने आप से अर्ज़ किया कि मुझे येह क्यूंकर यकीन हो कि आप ख़ुदा के पैगम्बर हैं? आप ने फ़रमाया कि उस खजूर के दरख़्त पर जो ख़ोशा लटक रहा है अगर मैं उस को अपने पास बुलाऊं और वोह मेरे पास आ जाए तो क्या तुम मेरी नुबुव्वत पर ईमान लाओगे ? उस ने कहा कि हां बेशक मैं आप का येह मो'जिज़ा देख कर ज़रूर आप को ख़ुदा का रसूल मान लूंगा। आप ने खजूर के उस ख़ोशे को बुलाया तो वोह फौरन ही चल कर दरख़्त से उतरा और आप के पास आ गया फिर आप ने हुक्म दिया तो वोह वापस जा कर दरख़्त में अपनी जगह पर पैवस्त हो गया। येह मोजिज़ा देख कर वोह आराबी फ़ौरन ही दामने इस्लाम में आ गया।

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 774* 

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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 585)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*दरख़्त चल कर आया :#01* हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर رضى الله تعالیٰ عنهما ने फरमाया कि हम लोग रसूलुल्लाह ﷺ के साथ एक सफ़र में थे। एक आ'राबी आप के पास आया, आप ने उस को इस्लाम की दा'वत दी, उस आ'राबी ने सुवाल किया कि क्या आप की नुबुव्वत पर कोई गवाह भी है? आप ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि हां येह दरख़्त जो मैदान के कनारे पर है मेरी नुबुव्वत की गवाही देगा। चुनान्चे आप ﷺ ने उस दरख्त को बुलाया और वोह फौरन ही ज़मीन चीरता हुवा अपनी जगह से चल कर बारगाहे अक़्दस में हाज़िर हो गया और उस ने ब आवाज़े बुलन्द तीन मरतबा आप की नुबुव्वत की गवाही दी। फिर आप ﷺ ने उस को इशारा फरमाया तो वोह दरख़्त ज़मीन में चलता हुवा अपनी जगह पर चला गया।

🌻 मुहद्दिस बज़्ज़ार व इमाम बैहकी व इमाम बग़वी ने इस हदीस में येह रिवायत भी तहरीर फरमाई है कि उस दरख्त ने बारगाहे अक़्दस में आ कर “اَلسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه” कहा, आ'राबी येह मो'जिज़ा देखते ही मुसलमान हो गया और जोशे अक़ीदत में अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह ﷺ मुझे इजाज़त दीजिये कि मैं आप को सज्दा करूं। आप ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि अगर मैं ख़ुदा के सिवा किसी दूसरे को सज्दा करने का हुक्म देता तो मैं औरतों को हुक्म देता कि वोह अपने शोहरों को सज्दा किया करें। येह फ़रमा कर आप ने उस को सज्दा करने की इजाज़त नहीं दी। फिर उस ने अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह (ﷺ)! अगर आप इजाज़त दें तो मैं आप के दस्ते मुबारक और मुक़द्दस पाउं को बोसा दूं। आप ﷺ ने उस को इस की इजाज़त दे दी। चुनान्चे उस ने आप के मुक़द्दस हाथ और मुबारक पाउं को वालिहाना अक़ीदत के साथ चूम लिया।

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 774* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 586)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*दरख़्त चल कर आया (#02) :* इसी तरह हज़रते जाबिर رضى الله تعالیٰ عنه कहते हैं कि सफ़र में एक मन्ज़िल पर हुज़ूरे अक़्दस ﷺ इस्तिन्जा फ़रमाने के लिये मैदान में तशरीफ ले गए मगर कहीं कोई आड़ की जगह नज़र नहीं आई हां अलबत्ता उस मैदान में दो दरख्त नज़र आए, जो एक दूसरे से काफ़ी दूरी पर थे। आप ﷺ ने एक दरख़्त की शाख पकड़ कर चलने का हुक्म दिया तो वोह दरख़्त इस तरह आप के साथ साथ चलने लगा जिस तरह मुहार वाला ऊंट मुहार पकड़ने वाले के साथ चलने लगता है फिर आप ﷺ ने दूसरे दरख़्त की टहनी थाम कर उस को भी चलने का इशारा फ़रमाया तो वोह भी चल पड़ा और दोनों दरख्त एक दूसरे से मिल गए और आप ने उस की आड़ में अपनी हाजत रफ्अ फरमाई। इस के बाद आप ﷺ ने हुक्म दिया तो वोह दोनों दरख़्त ज़मीन चीरते हुए चल पड़े और अपनी अपनी जगह पर पहुंच कर जा खड़े हुए।

📍*इनतिबाह :-* येही वोह मो'जिज़ा है जिस को हज़रते अल्लामा बूसेरी عَلَيْهِ رَحْمَةُ ने अपने क़सीदए बुर्दा में तहरीर फरमाया कि :
 جَاءَتْ لِدَعْوَتِهِ الْأَشْجَارُ سَاجِدَةً
 تَمْشِىْ إِلَيْهِ عَلٰى سَاقٍ بِلَا قَدَم 

✨ या'नी आप के बुलाने पर दरख्त सज्दा करते हुए और बिला क़दम के अपनी पिंडली से चलते हुए आप के पास हाज़िर हुए। 

📖 नीज़ पहली हदीस से साबित हुवा कि दीनदार बुजुर्गों मसलन उलमा व मशाइख की ता'ज़ीम के लिये उन के हाथ पाउं को बोसा देना जाइज़ है। चुनान्चे हज़रते इमाम नववी رضى الله تعالیٰ عنه ने अपनी किताब "अज़कार" में और हम ने अपनी किताब "नवादिरुल हदीस" में इस मस्अले को मुफ़स्सल तहरीर किया है। والله تعالى اعلم

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 775* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 587)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*छड़ी रौशन हो गई :* हज़रते अनस رضى الله تعالیٰ عنه कहते हैं कि दो सहाबी हज़रते उसैद बिन हुज़ैर और अब्बाद बिन बिशर رضى الله تعالیٰ عنهما अंधेरी रात में बहुत देर तक हुज़ूर ﷺ से बात करते रहे जब येह दोनों बारगाहे रिसालत से अपने घरों के लिये रवाना हुए तो एक की छड़ी ना गहां खुद ब खुद रौशन हो गई और वोह दोनों उसी छड़ी की रौशनी में चलते रहे जब कुछ दूर चल कर दोनों के घरों का रास्ता अलग अलग हो गया तो दूसरे की छड़ी भी रौशन हो गई और दोनों अपनी अपनी छड़ियों की रौशनी के सहारे सख्त अंधेरी रात में अपने अपने घरों तक पहुंच गए।   

💖 इसी तरह इमाम अहमद ने हज़रते अबू सईद खुदरी رضى الله تعالیٰ عنه से रिवायत की है कि एक मरतबा हज़रते क़तादा बिन नो'मान رضى الله تعالیٰ عنه ने हुज़ूर ﷺ के साथ इशा की नमाज़ पढ़ी। रात सख़्त अंधेरी थी और आस्मान पर घन्घोर घटा छाई हुई थी। ब वक्ते रवानगी हुज़ूर ﷺ ने अपने दस्ते मुबारक से उन्हें दरख़्त की एक शाख अता फरमाई और इरशाद फ़रमाया कि तुम बिला खौफ़ो खतर अपने घर जाओ येह शाख तुम्हारे हाथ में ऐसी रौशन हो जाएगी कि दस आदमी तुम्हारे आगे और दस आदमी तुम्हारे पीछे इस की रौशनी में चल सकें और जब तुम घर पहुंचोगे तो एक काली चीज़ को देखोगे उस को मार कर घर से निकाल देना। चुनान्चे ऐसा ही हुवा कि जूं ही हज़रते क़तादा رضى الله تعالیٰ عنه काशानए नुबुव्वत से निकले वोह शाख रौशन हो गई और वोह उसी की रौशनी में चल कर अपने घर पहुंच गए और देखा कि वहां एक काली चीज़ मौजूद है आप ने फरमाने नुबुव्वत के मुताबिक़ उस को मार कर घर से बाहर निकाल दिया। سبحان الله 

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 777* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 588)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*लकड़ी की तलवार :* 
जंगे बद्र के दिन हज़रते अ़काशा बिन मोहसिन رضى الله تعالیٰ عنه की तलवार टूट गई तो हुज़ूरे अक़्दस ﷺ ने उन को एक दरख़्त की टहनी दे कर फ़रमाया कि "तुम इस से जंग करो" वोह टहनी उन के हाथ में आते ही एक निहायत नफीस और बेहतरीन तलवार बन गई जिस से वोह उम्र भर तमाम लड़ाइयों में जंग करते रहे यहां तक कि हज़रते अमीरुल मोमिनीन अबू बक्र सिद्दीक़ رضى الله تعالیٰ عنه के दौरे ख़िलाफत में वोह शहादत से सरफराज़ हो गए।  

💖 इसी तरह हज़रते अब्दुल्लाह बिन जहश رضى الله تعالیٰ عنه की तलवार जंगे उहुद के दिन टूट गई थी तो उन को भी रसूलुल्लाह ﷺ ने एक खजूर की शाख दे कर इरशाद फ़रमाया कि "तुम इस से लड़ो" वोह हज़रते अब्दुल्लाह बिन जहश رضى الله تعالیٰ عنه के हाथ में आते ही एक बर्राक़ तलवार बन गई। हज़रते अब्दुल्लाह बिन जहश رضى الله تعالیٰ عنه की उस तलवार का नाम "उ़रजून" था येह खुलफा बनू अल अब्बास के दौरे हुक़ूमत तक बाक़ी रही यहां तक कि खलीफा मो'तसिम बिल्लाह के एक अमीर ने इस तलवार को बाईस दीनार में खरीदा और हज़रते अ़काशा رضى الله تعالیٰ عنه की तलवार का नाम "औन" था, येह दोनों तलवारें हुज़ूर ﷺ के मो'जिज़ात और आप के तसर्राफात की यादगार थीं।

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 777* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 589)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*रोने वाला सुतून (#01):* 
मस्जिदे नबवी में पहले मिम्बर नहीं था, खजूर के तना का एक सुतून था इसी से टेक लगा कर आप ख़ुत्बा पढ़ा करते थे। जब एक अन्सारी औरत ने एक मिम्बर बनवा कर मस्जिदे नबवी में रखा तो आप ने उस पर खड़े हो कर ख़ुत्बा देना शुरू कर दिया। ना गहां उस सुतून से बच्चों की तरह रोने की आवाज़ आने लगी और बा'ज़ रिवायात में आया है कि ऊंटनियों की तरह बिलबिलाने की आवाज़ आई। येह रावियाने हदीस के मुख्तलिफ़ ज़ौक़ की बिना पर रोने की मुख्तलिफ तश्बीहें हैं रावियों का मक़्सूद येह है कि दर्दे फ़िराक़ से बिलबिला कर और बे क़रार हो कर सुतून ज़ार ज़ार रोने लगा और बा'ज़ रिवायतों में येह भी आया है कि सुतून इस क़दर ज़ोर ज़ोर से रोने लगा कि करीब था कि जोशे गिर्या से फट जाए और उस रोने की आवाज़ को मस्जिदे नबवी के तमाम मुसल्लियों ने अपने कानों से सुना। 

🌻सुतून की गिर्या व ज़ारी को सुन कर हुज़ूर रहमतुल्लिल आलमीन ﷺ मिम्बर से उतर कर आए और सुतून पर तस्कीन देने के लिये अपना मुक़द्दस हाथ रख दिया और उस को अपने सीने से लगा लिया तो वोह सुतून इस तरह हिचकियां ले ले कर रोने लगा जिस तरह रोने वाले बच्चे को जब चुप कराया जाता है तो वोह हिचकियां ले ले कर रोने लगता है। बिल आखिर जब आप ने सुतून को अपने सीने से चिमटा लिया तो वोह सुकून पा कर ख़ामोश हो गया और आप ने इरशाद फ़रमाया कि सुतून का येह रोना इस बिना पर था कि येह पहले ख़ुदा का ज़िक्र सुनता था अब जो न सुना तो रोने लगा।

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 779* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 590)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*रोने वाला सुतून (#02):* 
और हज़रते बरीदा رضى الله تعالیٰ عنه की हदीस में येह भी वारिद है कि हुज़ूरे अकरम ﷺ ने उस सुतून को अपने सीने से लगा कर येह फ़रमाया कि ऐ सुतून! अगर तू चाहे तो मैं तुझ को फिर उसी बाग़ में तेरी पहली जगह पर पहुंचा दूं ताकि तू पहले की तरह हरा भरा दरख्त हो जाए और हमेशा फलता फूलता रहे और अगर तेरी ख़्वाहिश हो तो मैं तुझ को बाग़े बिहिश्त का एक दरख़्त बना देने के लिये ख़ुदा से दुआ कर दूं ताकि जन्नत में ख़ुदा के औलिया तेरा फल खाते रहें। येह सुन कर सुतून ने इतनी बुलन्द आवाज़ से जवाब दिया कि आस पास के लोगों ने भी सुन लिया, सुतून का जवाब येह था कि या रसूलल्लाह (ﷺ)! मेरी येही तमन्ना है कि मैं जन्नत का एक दरख़्त बना दिया जाऊं ताकि ख़ुदा के औलिया मेरा फल खाते रहें और मुझे हयाते जाविदानी मिल जाए। हुज़ूर ﷺ ने फरमाया कि ऐ सुतून! मैं ने तेरी इस आरजू को मंजूर कर लिया। फिर आप ने सामिईन को मुखातब कर के फ़रमाया कि ऐ लोगों! देखो इस सुतून ने दारुल फ़ना की ज़िन्दगी को ठुकरा कर दारुल बक़ा की हयात को इख़्तियार कर लिया। سبحان الله 

🌻 एक रिवायत में येह भी आया है कि आप ﷺ सुतून को अपने सीने से लगा कर इरशाद फ़रमाया कि मुझे उस ज़ात की क़सम है जिस के क़ब्ज़ए कु़दरत में मेरी जान है कि अगर मैं इस सुतून को अपने सीने से न चिमटाता तो येह क़ियामत तक रोता ही रहता।

📖 वाज़ेह रहे कि गिर्यए सुतून का येह मो'जिज़ा अहादीस और सीरत की किताबों में ग्यारह सहाबियों से मन्कूल है जिन के नाम येह हैं : (1) जाबिर बिन अब्दुल्लाह (2) उ़बय्य बिन का'ब (3) अनस बिन मालिक (4) अब़्दुल्लाह बिन उमर (5) अ़ब्दुल्लाह बिन अब्बास (6) सहल बिन सा'द (7) अबू सईद खुदरी (8) बरीदा (9) उम्मे सलमह (10) मुत्त़लिब बिन अबी वदाआ़ (11) आ़इशा (رضى الله تعالیٰ عنهم) फिर दौरे सहाबा के बा'द भी हर ज़माने में रावियों की एक जमाअते कसीरा इस हदीस को रिवायत करती रही यहां तक कि अल्लामा काज़ी इयाज़ और अल्लामा ताजुद्दीन सुबकी (رَحْمَةُ اللّٰهِ تَعَالٰى عَلَيْهِمَا) ने फ़रमाया कि गिर्यए सुतून की हदीस "ख़बरे मुतवातिर" है।   

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 780* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 591)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*रोने वाला सुतून (#03):* 
इस सुतून के बारे में एक रिवायत है कि आप ﷺ ने उस को अपने मिम्बर के नीचे दफ्न फ़रमा दिया और एक रिवायत में आया है कि आप ने उस को मस्जिदे नबवी की छत में लगा दिया। इन दोनों रिवायतों में शारिहीने हदीस ने इस तरह त़तबीक़ दी है कि पहले हुज़ूर ﷺ ने इस को दफ़्न फ़रमा दिया फिर इस ख़्याल से कि येह लोगों के क़दमों से पामाल होगा उस को ज़मीन से निकाल कर छत में लगा दिया इस तरह ज़मीन में दफ्न करने और छत में लगाने की दोनों रिवायतें दो वक़्तों में होने के लिहाज़ से दुरुस्त हैं। وَاللّٰهُ تَعَالٰى اَعلم

🌻फिर हुज़ूरे अक्दस ﷺ के बाद जब ता'मीरे जदीद के लिये मस्जिदे नबवी मुन्हदिम की गई और येह सुतून छत से निकाला गया तो इस को मश्हूर सहाबी हज़रते उबय्य बिन का'ब رضى الله تعالیٰ عنه ने एक मुक़द्दस तबर्रुक समझ कर उठा लिया और इस को अपने पास रख लिया यहां तक कि येह बिल्कुल ही कुहना और पुराना हो कर चूर चूर हो गया।

🌷इस सुतून को दफ्न करने के बारे में अल्लामा ज़ुरक़ानी رَحْمَةُ اللّٰهِ تَعَالٰى عَلَيْهِ ने यह नुक्ता तहरीर फ़रमाया है कि अगर्चे येह खुश्क लकड़ी का एक सुतून था मगर येह दरजात व मरातिब में एक मर्दे मोमिन के मिस्ल करार दिया गया क्यूं कि येह हुज़ूर ﷺ के इश्क़ व महब्बत में रोया था और रसूलुल्लाह ﷺ के साथ इश्क़ व महब्बत का बरताव येह ईमान वालों ही का ख़ास्सा है। بیشک سبحان الله  

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 781* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 592)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*जानवरों का सज्दा करना :* 
अहादीस की अकसर किताबों में चन्द अल्फाज़ के तगय्युर के साथ येह रिवायत मजकूर है कि एक अन्सारी का ऊंट बिगड़ गया था और किसी के काबू में नहीं आता था बल्कि लोगों को काटने के लिये हम्ला किया करता था। लोगों ने हुज़ूर ﷺ को मुत्तलअ किया। आप ने खुद उस ऊंट के पास जाने का इरादा फ़रमाया तो लोगों ने आप को रोका कि या रसूलल्लाह (ﷺ)! येह ऊंट लोगों को दौड़ कर कुत्ते की तरह काट खाता है। आप ﷺ ने इरशाद फ़रमाया "मुझे इस का कोई ख़ौफ़ नहीं है" येह कह कर आप आगे बढ़े तो ऊंट ने आप ﷺ के सामने आ कर अपनी गरदन डाल दी और आप को सज्दा किया आप ﷺ ने उस के सर और गरदन पर अपना दस्ते शफ्क़त फैर दिया तो वोह बिल्कुल ही नर्म पड़ गया और फ़रमां बरदार हो गया और आप ने उस को पकड़ कर उस के मालिक के हवाले कर दिया। फिर येह इरशाद फ़रमाया कि ख़ुदा की हर मख़्लूक जानती और मानती है कि मैं अल्लाह का रसूल हूं लेकिन जिन्नों और इन्सानों में से जो कुफ्फ़ार हैं वोह मेरी नुबुव्वत का इक़रार नहीं करते। 

🌻 सहाबए किराम رضى الله تعالیٰ عنهم ने ऊंट को सज्दा करते हुए देख कर अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह (ﷺ)! जब जानवर आप को सज्दा करते हैं तो हम इन्सानों को तो सब से पहले आप को सज्दा करना चाहिये येह सुन कर आप ﷺ ने फरमाया कि अगर किसी इन्सान का दूसरे इन्सान को सज्दा करना जाइज़ होता तो मैं औरतों को हुक्म देता कि वोह अपने शोहरों को सज्दा किया करें।   

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 782* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 593)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*बारगाहे रिसालत में ऊंट की फरयाद :* 
एक बार हुज़ूरे अक़्दस ﷺ एक अन्सारी के बाग़ में तशरीफ ले गए वहां एक ऊंट खड़ा हुवा ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रहा था। जब उस ने आप को देखा तो एक दम बिलबिलाने लगा और उस की दोनों आंखों से आंसू जारी हो गए। आप ﷺ ने करीब जा कर उस के सर और कन्पटी पर अपना दस्ते शफ्क़त फैरा तो वोह तसल्ली पा कर बिल्कुल खामोश हो गया। फिर आप ﷺ ने लोगों से दरयाफ़्त फ़रमाया कि इस ऊंट का मालिक कौन है ? लोगों ने एक अन्सारी का नाम बताया, आप ﷺ ने फ़ौरन उन को बुलवाया और फ़रमाया कि अल्लाह तआला ने इन जानवरों को तुम्हारे क़ब्ज़े में दे कर इन को तुम्हारा महकूम बना दिया है लिहाज़ा तुम लोगों पर लाज़िम है कि तुम इन जानवरों पर रहम किया करो। तुम्हारे इस ऊंट ने मुझ से तुम्हारी शिकायत की है कि तुम इस को भूका रखते हो और इस की ताक़त से ज़ियादा इस से काम ले कर इस को तक्लीफ देते हो। 

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 783* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 594)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷 *बे दूध की बकरी ने दूध दिया :* 
हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद رضى الله تعالیٰ عنه कहते हैं कि मैं एक नौ उम्र लड़का था और मक्का में काफ़िरों के सरदार उक़्बा बिन अबी मुईत़ की बकरियां चराया करता था। इत्तिफ़ाक़ से हुज़ूर ﷺ और हज़रते अबू बक्र सिद्दीक़ رضى الله تعالیٰ عنه का मेरे पास से गुज़र हुवा, आप ﷺ ने मुझ से फरमाया कि ऐ लड़के ! अगर तुम्हारी बकरियों के थनों में दूध हो तो हमें भी दूध पिलाओ, मैं ने अर्ज़ किया कि मैं इन बकरियों का मालिक नहीं हूं बल्कि इन का चरवाहा होने की हैसिय्यत से अमीन हूं, मैं भला बिगैर मालिक की इजाज़त के किस तरह इन बकरियों का दूध किसी को पिला सकता हूं? आप ﷺ ने फरमाया कि क्या तुम्हारी बकरियों में कोई बच्चा भी है? मैं ने कहा : "जी हां" आप ने फरमाया: उस बच्चे को मेरे पास लाओ। मैं ले आया। हज़रते अबू बक्र सिद्दीक़ رضى الله تعالیٰ عنه ने उस बच्चे की टांगों को पकड़ लिया और आप ﷺ ने उस के थन को अपना मुक़द्दस हाथ लगा दिया तो उस का थन दूध से भर गया फिर एक गहरे पथ्थर में आप ﷺ ने उस का दूध दोहा, पहले खुद पिया फिर हज़रते अबू बक्र सिद्दीक़ رضى الله تعالیٰ عنه को पिलाया। हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद رضى الله تعالیٰ عنه कहते हैं कि इस के बा'द मुझ को भी पिलाया फिर आप ﷺ ने उस बकरी के थन में हाथ मार कर फ़रमाया कि ऐ थन ! तू सिमट जा। चुनान्चे फौरन ही उस का थन सिमट कर खुश्क हो गया।

💖 हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद رضى الله تعالیٰ عنه का बयान है कि मैं इस मो'जिज़े को देख कर बेहद मुतअस्सिर हुवा और मैं ने अर्ज़ किया कि आप पर आस्मान से जो कलाम नाज़िल हुवा है मुझे भी सिखाइये। आप ﷺ ने फ़रमाया कि तुम ज़रूर सीखो तुम्हारे अन्दर सीखने की सलाहिय्यत है। चुनान्चे मैं ने आप की ज़बाने मुबारक से सुन कर क़ुरआने मजीद की सत्तर सूरतें याद कर लीं। हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद رضى الله تعالیٰ عنه कहा करते थे कि मेरे इस्लाम क़बूल करने में इस मो'जिज़े को बहुत बड़ा दख़ल है। سبحان الله  

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 783* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 595)
 
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🌷*तब्लीगे इस्लाम करने वाला भेड़िया :* 
हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه फ़रमाते हैं कि एक भेड़िये ने एक बकरी को पकड़ लिया लेकिन बकरियों के चरवाहे ने भेड़िये पर हम्ला कर के उस से बकरी को छीन लिया। भेड़िया भाग कर एक टीले पर बैठ गया और कहने लगा कि ऐ चरवाहे ! अल्लाह तआला ने मुझ को रिज़्क दिया था मगर तूने उस को मुझ से छीन लिया। चरवाहे ने येह सुन कर कहा कि ख़ुदा की क़सम ! मैं ने आज से ज़ियादा कभी कोई हैरत अंगेज़ और तअज्जुब खैज़ मंज़र नहीं देखा कि एक भेड़िया अरबी ज़बान में मुझ से कलाम करता है। भेड़िया कहने लगा कि ऐ चरवाहे ! इस से कहीं ज़ियादा अजीब बात तो येह है कि तू यहां बकरियां चरा रहा है और तू उस नबी को छोड़े और उन से मुंह मोड़े हुए बैठा है जिन से ज़ियादा बुजुर्ग और बुलन्द मर्तबा कोई नबी नहीं आया। इस वक़्त जन्नत के तमाम दरवाजे खुले हुए हैं और तमाम अहले जन्नत उस नबी के साथियों की शाने जिहाद का मंज़र देख रहे हैं और तेरे और उस नबी के दरमियान बस एक घाटी का फासिला है। काश! तू भी उस नबी की खिदमत में हाज़िर हो कर अल्लाह के लश्करों का एक सिपाही बन जाता। चरवाहे ने इस गुफ्तगू से मुतअस्सिर हो कर कहा कि अगर मैं यहां से चला गया तो मेरी बकरियों की हिफाज़त कौन करेगा? भेड़िये ने जवाब दिया कि तेरे लौटने तक मैं खुद तेरी बकरियों की निगहबानी करूंगा। 

🌻 चुनान्चे चरवाहे ने अपनी बकरियों को भेड़िये के सिपुर्द कर दिया और खुद बारगाहे रिसालत में हाज़िर हो कर मुसलमान हो गया और वाकेई भेड़िये के कहने के मुताबिक़ उस ने नबी ﷺ के असहाब को जिहाद में मसरूफ़ पाया। फिर चरवाहे ने भेड़िये के कलाम का हुज़ूर ﷺ से तज़किरा किया तो आप ﷺ ने फ़रमाया कि तुम जाओ तुम अपनी सब बकरियों को ज़िन्दा व सलामत पाओगे।चुनान्चे चरवाहा जब लौटा तो येह मन्ज़र देख कर हैरान रह गया कि भेड़िया उस की बकरियों की हिफाजत कर रहा है और उस की कोई बकरी भी जाएअ नहीं हुई है चरवाहे ने खुश हो कर भेड़िये के लिये एक बकरी ज़ब्ह कर के पेश कर दी और भेड़िया उस को खा कर चल दिया। 

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 784* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 596)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*एलाने ईमान करने वाली गोह :* हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर رضى الله تعالى عنهما से रिवायत है कि क़बीलए बनी सुलैम का एक आ'राबी ना गहां हुजूरे अक़्दस ﷺ की नूरानी महफ़िल के पास से गुज़रा आप अपने अस्हाब के मज्मअ़ में तशरीफ़ फ़रमा थे। येह आ'राबी जंगल से एक गोह पकड़ कर ला रहा था आ'राबी ने आप के बारे में लोगों से सुवाल किया कि वोह कौन हैं? लोगों ने बताया कि येह अल्लाह के नबी हैं। आ'राबी येह सुन कर आप की तरफ मुतवज्जेह हुवा और कहने लगा कि मुझे लात व उज़्ज़ा की क़सम है कि मैं उस वक़्त तक आप पर ईमान नहीं लाऊंगा जब तक मेरी येह गोह आप की नुबुव्वत पर ईमान न लाए, येह कह कर उस ने गोह को आप के सामने डाल दिया। आप ﷺ ने गोह को पुकारा तो उस ने “لَبَيكَ وَسَعْدَيْكَ” इतनी बुलन्द आवाज़ से कहा कि तमाम हाज़िरीन ने सुन लिया। फिर आप ﷺ ने पूछा कि तेरा मा'बूद कौन है ? गोह ने जवाब दिया कि मेरा मा'बूद वोह है कि उस का अर्श आस्मान में है और उस की बादशाही ज़मीन में है और उस की रहमत जन्नत में है और उस का अज़ाब जहन्नम में है। फिर आप ﷺ ने पूछा कि ऐ गोह ! येह बता कि मैं कौन हूं? गोह ने बुलन्द आवाज़ से कहा कि आप रब्बुल आलमीन के रसूल हैं और खातमुन्नबिय्यीन है जिस ने आप को सच्चा माना वोह काम्याब हो गया और जिस ने आप को झुटलाया वोह ना मुराद हो गया। 

💖 येह मंज़र देख कर आ'राबी इस कदर मुतअस्सिर हुवा कि फौरन ही कलिमा पढ़ कर मुसलमान हो गया और कहने लगा कि या रसूलल्लाह (ﷺ)! मैं जिस वक़्त आप के पास आया था तो मेरी नज़र में रूए ज़मीन पर आप से ज़ियादा ना पसन्द कोई आदमी नहीं था लेकिन इस वक़्त मेरा येह हाल है कि आप मेरे नज़्दीक मेरी औलाद बल्कि मेरी जान से भी ज़ियादा प्यारे हो गए हैं। आप ﷺ ने फ़रमाया कि खुदा के लिये हम्द है जिस ने तुझ को ऐसे दीन की हिदायत दी जो हमेशा ग़ालिब रहेगा और कभी मग्लूब नहीं होगा। 

🌷फिर आप ﷺ ने उस को सूरए फातिहा और सूरए इख्लास की ता'लीम दी। आ'राबी क़ुरआन की इन दो सूरतों को सुन कर कहने लगा कि मैं ने बड़े बड़े फ़सीह व बलीग, तवील व मुख़्तसर हर क़िस्म के कलामों को सुना है मगर ख़ुदा की क़सम ! मैं ने आज तक इस से बढ़ कर और इस से बेहतर कलाम कभी नहीं सुना। फिर आप ﷺ ने सहाबए किराम رضى الله تعالیٰ عنهم से फरमाया कि येह क़बीलए बनी सुलैम का एक मुफ़्लिस इन्सान है तुम लोग इस की माली इमदाद कर दो। येह सुन कर बहुत से लोगों ने उस को बहुत कुछ दिया यहां तक कि हज़रते अब्दुर्रहमान बिन औफ़ رضى الله تعالیٰ عنه ने उस को दस गाभन ऊंटनियां दीं। येह आ'राबी तमाम माल व सामान को साथ ले कर जब अपने घर की तरफ चला तो रास्ते में देखा कि उस की क़ौम बनी सुलैम के एक हज़ार सुवार नेज़ा और तलवार लिये हुए चले आ रहे हैं। उस ने पूछा कि तुम लोग कहां के लिये और किस इरादे से चले हो ? सुवारों ने जवाब दिया कि हम लोग उस शख्स से लड़ने के लिये जा रहे हैं जो येह गुमान करता है कि वोह नबी है और हमारे देवताओं को बुरा भला कहता है। येह सुन कर आ'राबी ने बुलन्द आवाज़ से कलिमा पढ़ा और अपना सारा वाक़िआ उन सुवारों से बयान किया। उन सुवारों ने जब आ'राबी की ज़बान से उस का ईमान अफ़रोज़ बयान सुना तो सब ने لَا اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ مُحَمَّدٌرَّسُولُ اللّٰه पढ़ा। سبحان الله 

💖 फिर सब के सब बारगाहे नुबुव्वत में हाज़िर हुए तो हुज़ूरे अन्वर ﷺ इस क़दर तेज़ी के साथ उन लोगों के इस्तिक़्बाल के लिये खड़े हुए कि आप की चादर आप के जिस्मे अत्हर से गिर पड़ी और येह लोग कलिमा पढ़ते हुए अपनी अपनी सुवारियों से उतर पड़े और अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह ﷺ! आप हमें जो हुक्म देंगे हम आप के हर हुक्म की फ़रमां बरदारी करेंगे! आप ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि तुम लोग हज़रते खालिद बिन अल वलीद رضى الله تعالیٰ عنه के झन्डे के नीचे जिहाद करते रहो। हज़रते अब्दुल्लाह बिन उ़़मर رضى الله تعالیٰ عنه का बयान है कि हुज़ूर ﷺ के ज़माने में बनी सुलैम के सिवा कोई क़बीला भी ऐसा नहीं था जिस के एक हज़ार आदमी बयक वक़्त मुसलमान हुए हों। इस हदीस को तबरानी व बैहकी व हाकिम व इब्ने अदी जैसे बड़े बड़े मुहद्दिसीन ने रिवायत किया है। 

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 786* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 597)
 
> *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞*

🌷*इनतिबाह :* 
इस किस्म के सेंकड़ों मो'जिज़ात में से येह चन्द वाक़िआत इस बात की सूरज से ज़ियादा रौशन दलीलें हैं कि रूए ज़मीन के तमाम हैवानात हुज़ूरे अकरम ﷺ को जानते पहचानते और मानते हैं कि आप नबिय्ये आखिरुज़्ज़मां, खातमे पैगम्बरां हैं और येह सब के सब आप की मद्हो सना के खतीब और आप की मुक़द्दस दा'वते इस्लाम के नक़ीब हैं और येह सब आप के अम्र व नहय की हुक्मरानी और आप के इक़्तिदार व तसर्रुफ़ात की सुल्तानी को तस्लीम करते हुए आप के हर फ़रमान को अपने लिये वाजिबुल ईमान और लाज़िमुल अमल समझते हैं और आप के ए'ज़ाज़ो इकराम और आप की ता'ज़ीम व एहतिराम को अपने लिये सरमायए हयात तसव्वुर करते हैं। काश ! इस ज़माने के मुस्लिम नुमा कलिमा पढ़ने पढ़ाने वाले इन्सान इन बे ज़बान जानवरों से ता'ज़ीम व एहतिरामे रसूल का सबक़ सीखते और दिलो जान से इस रौशन हक़ीक़त पर ध्यान देते कि :

 *अपने मौला की है बस शान अज़ीम,*
  *जानवर भी करें जिन की ता'ज़ीम*

 *संग करते हैं अदब से तस्लीम,*
  *पेड़ सज्दे में गिरा करते हैं*

*हां यहीं करती हैं चिड़ियां फ़रयाद,*
 *हां यहीं चाहती है हिरनी दाद*
         
*इसी दर पे शुतराने नाशाद,*
*गिलए रन्जो अना करते हैं*
                         
(आ'ला हज़रत قُدِّسَ سِرُّهٗ)  

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 788* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 598)
 
> *💫❝आलमे इन्सानिय्यत के मो'जिज़ात❞*

🌷*थोड़ी चीज़ जियादा हो गई :* तमाम दुन्या जानती है कि मुसलमानों का इब्तिदाई ज़माना बहुत ही फ़क़्रो फाक़े में गुज़रा है। कई कई दिन गुज़र जाते थे कि उन लोगों को कोई चीज़ खाने के लिये नहीं मिलती थी। ऐसी हालत में अगर रसूलुल्लाह ﷺ का येह मो'जिज़ा उन फ़ाक़ा ज़दा मुसलमानों की नुसरत व दस्त गीरी न करता तो भला उन मुफ़्लिस और फ़ाक़ा मस्त-मुसलमानों का क्या हाल होता। 

💖 हज़रते ईसा عَلَيْهِ السَّلَام ने आस्मान से उतरने वाले दस्तर ख़्वान की सात रोटियों और सात मछलियों से कई सो आदमियों को शिकम सैर कर दिया। यक़ीनन येह उन का बहुत ही अज़ीमुश्शान मो'जिज़ा है जिस का ज़िक्र इन्जील व क़ुरआन दोनों मुक़द्दस आस्मानी किताबों में मजकूर है। लेकिन हुज़ूर रहमतुल्लिल आलमीन ﷺ के दस्ते मुबारक से सेंकड़ों मरतबा इस किस्म की मो'जिज़ाना बरकतों का जुहूर हुवा कि थोड़ा सा खाना पानी सेंकड़ों बल्कि हज़ारों इन्सानों को शिकम सैर और - सैराब करने के लिये काफ़ी हो गया। इस किस्म के सेंकड़ों मो'जिज़ात में से मुन्दरिजे जैल चन्द मो'जिज़ात आप ﷺ के मो'जिज़ाना तसर्रुफात की आयाते बय्यिनात बन कर अहादीस की किताबों में इस तरह चमक रहे हैं जिस तरह आस्मान पर अंधेरी रातों में सितारे चमकते और जगमगाते रहते हैं। 

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 789* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 599)
 
*💫❝आलमे इन्सानिय्यत के मो'जिज़ात❞*

> *थोड़ी चीज़ ज़ियादा हो गई 🥰*

🌷*उम्मे सुलैम की रोटियां :* 
एक दिन हज़रते अबू त़ल्हा رضى الله تعالیٰ عنه अपने घर में आए और अपनी बीवी हज़रते उम्मे सुलैम رضى الله تعالیٰ عنها से कहा कि क्या तुम्हारे पास खाने की कोई चीज़ है? मैं ने हुज़ूर ﷺ की कमज़ोर आवाज़ से येह महसूस किया कि आप ﷺ भूके हैं। उम्मे सुलैम رضى الله تعالیٰ عنها ने जव की चन्द रोटियां दुपट्टे में लपेट कर हज़रते अनस رضى الله تعالیٰ عنه के हाथ आप की खिदमत में भेज दीं। हज़रते अनस رضى الله تعالیٰ عنه जब बारगाहे नुबुव़वत में पहुंचे तो आप ﷺ मस्जिदे नबवी में सहाबए किराम رضى الله تعالیٰ عنهم के मज़्मअ में तशरीफ़ फ़रमा थे। आप ﷺ ने पूछा कि क्या अबू त़ल्हा ने तुम्हारे हाथ खाना भेजा है? उन्हों ने कहा कि "जी हां" येह सुन कर आप अपने अस्हाब के साथ उठे और हज़रते अबू त़ल्हा رضى الله تعالیٰ عنه के मकान पर तशरीफ लाए। हज़रते अनस رضى الله تعالیٰ عنه ने दौड़ कर हज़रते अबू त़ल्हा رضى الله تعالیٰ عنه को इस बात की ख़बर दी, उन्हों ने बीबी उम्मे सुलैम से कहा कि हुज़ूर ﷺ एक जमाअत के साथ हमारे घर पर तशरीफ ला रहे हैं। 

🌻हज़रते अबू त़ल्हा رضى الله تعالیٰ عنه ने मकान से निकल कर निहायत ही गर्मजोशी के साथ आप का इस्तिक़्बाल किया आप ने तशरीफ़ ला कर हज़रते बीबी उम्मे सुलैम رضى الله تعالیٰ عنها से फरमाया कि जो कुछ तुम्हारे पास हो लाओ। उन्हों ने वोही चन्द रोटियां पेश कर दीं जिन को हज़रते अनस رضى الله تعالیٰ عنه के हाथ बारगाहे रिसालत में भेजा था। आप ﷺ के हुक्म से उन रोटियों का चूरा बनाया गया और हज़रते बीबी उम्मे सुलैम رضى الله تعالیٰ عنها ने उस चूरे पर बतौरे सालन के घी डाल दिया, उन चन्द रोटियों में आप के मो'जिज़ाना तसर्राफात से इस क़दर बरकत हुई कि आप दस दस आदमियों को मकान के अन्दर बुला बुला कर खिलाते रहे और वोह लोग खूब शिकम सैर हो कर खाते रहे और जाते रहे यहां तक कि सत्तर या अस्सी आदमियों ने खूब शिकम सैर हो कर खा लिया। سبحان الله 

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 790* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 600)
 
*💫❝आलमे इन्सानिय्यत के मो'जिज़ात❞*

> *थोड़ी चीज़ ज़ियादा हो गई 🥰*

🌷*हज़रते जाबिर की खजूरें :* 
हज़रते जाबिर رضى الله تعالیٰ عنه के वालिद यहूदियों के कर्ज़दार थे और जंगे उहुद में शहीद हो गए, हज़रते जाबिर رضى الله تعالیٰ عنه बारगाहे अक़्दस में हाज़िर हुए और अर्ज़ किया या रसूलल्लाह (ﷺ) ! मेरे वालिद ने अपने ऊपर क़र्ज़ छोड़ कर वफ़ात पाई है और खजूरों के सिवा मेरे पास क़र्ज़ अदा करने का कोई सामान नहीं है, सिर्फ खजूरों की पैदावार से कई बरस तक येह कर्ज़ अदा नहीं हो सकता आप मेरे बाग़ में तशरीफ ले चलें ताकि आप के अदब से यहूदी अपना कर्ज़ वुसूल करने में मुझ पर सख्ती न करें। चुनान्चे आप बाग़ में तशरीफ लाए और खजूरों का जो ढेर लगा हुवा था उस के गिर्द चक्कर लगा कर दुआ फरमाई और ख़ुद खजूरों के ढेर पर बैठ गए। आप के मो'जिज़ाना तसर्रफ़ और दुआ की तासीर से उन खजूरों में इस क़दर बरकत हुई कि तमाम कर्ज़ अदा हो गया और जिस क़दर खजूरें कर्जदारों को दी गई उतनी ही बच रहीं। 
 سبحان الله سبحان الله

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 791* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 601)
 
*💫❝आलमे इन्सानिय्यत के मो'जिज़ात❞*

> *थोड़ी चीज़ ज़ियादा हो गई 🥰*

🌷*हज़रते अबू हुरैरा की थेली :* 
हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه का बयान है कि मैं हुज़ूरे अक़्दस ﷺ की खिदमते अक़्दस में कुछ खजूरें ले कर हाज़िर हुवा और अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह ﷺ इन खजूरों में बरकत की दुआ फ़रमा दीजिये! आप ﷺ ने उन खजूरों को इकठ्ठा कर के दुआए बरकत फ़रमा दी और इरशाद फ़रमाया कि तुम इन को अपने तोशादान में रख लो और तुम जब चाहो हाथ डाल कर इस में से निकालते रहो लेकिन कभी तोशादान झाड़ कर बिल्कुल खाली न कर देना। चुनान्चे हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه तीस बरस तक उन खजूरों को खाते और खिलाते रहे बल्कि कई मन उस में से खैरात भी कर चुके मगर वोह खत्म न हुई। سبحان الله سبحان الله

🌻हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه हमेशा उस थेली को अपनी कमर से बांधे रहते थे यहां तक कि हज़रते उसमान رضى الله تعالیٰ عنه की शहादत के दिन वोह थेली उन की कमर से कट कर कहीं गिर गई। 

🌷इस थेली के जाएअ होने का हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه को उम्र भर सदमा और अफ्सोस रहा। चुनान्चे वोह हज़रते उसमान رضى الله تعالیٰ عنه की शहादत के दिन निहायत रिक्कत अंगेज़ और दर्द भरे लहजे में येह शे'र पढ़ते हुए चलते फिरते थे कि

   لِلنَّاسِ هَمٌّ وَلِىْ هَمَّانِ بَيْنَهُمْ
 هَمُّ الْجِرَابِ وَهَمُّ الشَّيْخِ عُثْمَانَا 

✨ लोगों के लिये एक ग़म है और मेरे लिये दो ग़म हैं एक थेली का ग़म दूसरे शैख उसमान رضى الله تعالیٰ عنه का ग़म।

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 792* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 602)
 
*💫❝आलमे इन्सानिय्यत के मो'जिज़ात❞*

> *थोड़ी चीज़ ज़ियादा हो गई 🥰*

🌷*उम्मे मालिक का कुप्पा :* 
हज़रते उम्मे मालिक رضى الله تعالیٰ عنها के पास एक कुप्पा था जिस में वोह हुज़ूर नबिय्ये करीम ﷺ के पास हदिय्ये में घी भेजा करती थीं उस कुप्पे में इतनी अज़ीम बरकतों का जुहूर हुवा कि जब भी उम्मे मालिक رضى الله تعالیٰ عنها के बेटे सालन मांगते थे और घर में कोई सालन नहीं होता था तो वोह उस कुप्पे में से घी निकाल कर अपने बेटों को दे दिया करती थीं। एक मुद्दते दराज़ तक वोह हमेशा उस कुप्पे में से घी निकाल निकाल कर अपने घर का सालन बनाया करती थीं। एक दिन उन्हों ने उस कुप्पे को निचोड़ कर बिल्कुल ही खाली कर दिया जब बारगाहे नुबुव्वत में हाज़िर हुई तो आप ﷺ ने पूछा कि क्या तुम ने उस कुप्पे को निचोड़ डाला? उन्हों ने कहा कि "जी हां" आप ﷺ ने फ़रमाया कि अगर तुम उस कुप्पे को न निचोड़तीं और यूं ही छोड़ देतीं तो हमेशा उस में से घी निकलता ही रहता। سبحان الله 
इस हदीस को इमाम मुस्लिम ने रिवायत किया है!

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 792* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 603)
 
*💫❝आलमे इन्सानिय्यत के मो'जिज़ात❞*

> *थोड़ी चीज़ ज़ियादा हो गई 🥰*

🌷*बा बरकत प्याला :* हज़रते समुरह बिन जुन्दब رضى الله تعالیٰ عنه कहते हैं कि हुज़ूर ﷺ के पास एक प्याला भर कर खाना था, हम लोग दस दस आदमी बारी बारी सुब्ह से शाम तक उस प्याले में से लगातार खाते रहे। लोगों ने पूछा कि एक ही प्याला तो खाना था तो वोह कहां से बढ़ता रहता था ? (कि लोग इस क़दर ज़ियादा ता'दाद में दिन भर उस को खाते रहे) तो उन्हों ने आस्मान की तरफ इशारा कर के कहा कि "वहां से।" سبحان اللّٰه

🌷*थोड़ा तोशा अज़ीम बरकत :* 
हुज़ूरे अक़्दस ﷺ चौदह सो अश्खास की जमाअत के साथ एक सफ़र में थे, सहाबए किराम رضى الله تعالیٰ عنهم ने भूक से बेताब हो कर सुवारी की ऊंटनियों को ज़ब्ह करने का इरादा किया तो आप ﷺ ने मन्अ फरमा दिया और हुक्म दिया कि तमाम लश्कर वाले अपना अपना तोशा एक दस्तर ख़्वान पर जम्अ करें। चुनान्चे जिस के पास जो कुछ था ला कर रख दिया तो तमाम सामान इतनी जगह में आ गया जिस पर एक बकरी बैठ सकती थी लेकिन चौदह सो आदमियों ने उस में से शिकम सैर हो कर खा भी लिया और अपने अपने तोशादानों को भी भर लिया। खाने के बा'द आप ﷺ ने पानी मांगा, एक सहाबी رضى الله تعالیٰ عنه एक बरतन में थोड़ा सा पानी लाए, आप ﷺ ने उस को प्याले में उंडेल दिया और अपना दस्ते मुबारक उस में डाल दिया तो चौदह सो आदमियों ने उस से वुज़ू किया। سبحان الله 

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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 604)
 
*💫❝आलमे इन्सानिय्यत के मो'जिज़ात❞*

> *थोड़ी चीज़ ज़ियादा हो गई 🥰*

🌷*बरकत वाली कलेजी :* 
एक सफ़र में हुज़ूरे अन्वर ﷺ के साथ एक सो तीस सहाबए किराम رضى الله تعالیٰ عنهم हमराह थे आप ﷺ ने उन लोगों से दरयाफ़्त फरमाया कि क्या तुम लोगों के पास खाने का सामान है? येह सुन कर एक शख्स एक सा आटा लाया और वोह गूंधा गया फिर एक बहुत तन्दुरुस्त लम्बा चौड़ा काफ़िर बकरियां हांकता हुवा आप के पास आया। आप ने उस से एक बकरी खरीदी और ज़ब्ह करने के बा'द उस की कलेजी को भूनने का हुक्म दिया फिर एक सो तीस आदमियों में से हर एक का उस कलेजी में से एक एक बोटी काट कर हिस्सा लगाया, अगर वोह हाज़िर था तो उस को अता फरमा दिया और अगर वोह गाइब था तो उस का हिस्सा छुपा कर रख दिया, जब गोश्त तय्यार हुवा तो उस में से दो प्याला भर कर अलग रख दिया फिर बाक़ी गोश्त और एक सा आटे की रोटी से एक सो तीस आदमियों की जमाअत शिकम सैर खा कर आसूदा हो गई और दो प्याला भर कर गोश्त फ़ाज़िल बच गया जिस को ऊंट पर लाद लिया गया। سبحان اللّٰه 

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 794* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 605)
 
*💫❝आलमे इन्सानिय्यत के मो'जिज़ात❞*

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🌷*हज़रते अबू हुरैरा और एक प्याला दूध :* 
एक दिन हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه भूक से निढाल हो कर रास्ते में बैठ गए, हज़रते अबू बक्र सिद्दीक़ رضى الله تعالیٰ عنه सामने से गुज़रे तो उन से इन्हों ने क़ुरआन की एक आयत को दरयाप्त किया मक़्सद येह था कि शायद वोह मुझे अपने घर ले जा कर कुछ खिलाएं मगर उन्हों ने रास्ता चलते हुए आयत बता दी और चले गए। फिर हज़रते उमर رضى الله تعالیٰ عنه उस रास्ते से निकले उन से भी इन्हों ने एक आयत का मतलब पूछा गरज़ वोही थी कि वोह कुछ खिला देंगे मगर वोह भी आयत का मतलब बता कर चल दिये। 

💖 इस के बा'द हुज़ूरे अक़्दस ﷺ तशरीफ़ लाए और हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه के चेहरे को देख कर अपनी ख़ुदादाद बसीरत से जान लिया कि "येह भूके हैं" आप ﷺ ने उन्हें पुकारा, उन्हों ने जवाब दिया और साथ हो लिये जब आप काशानए नुबुव्वत में पहुंचे तो घर में दूध से भरा हुवा एक प्याला देखा। घर वालों ने आप को उस शख्स का नाम बतलाया जिस ने दूध का येह हदिय्या भेजा था। आप ﷺ ने हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه को हुक्म दिया कि जाओ और तमाम अस्हाबे सुफ़्फ़ा को बुला लाओ। हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه अपने दिल में सोचने लगे कि एक ही प्याला तो दूध है इस दूध का सब से ज़ियादा हक़दार तो मैं था अगर मुझे मिल जाता तो मुझ को भूक की तक़्लीफ़ से कुछ राहत मिल जाती अब देखिये अस्हाबे सुफ़्फ़ा के आ जाने के बा'द भला इस में से कुछ मुझे मिलता है या नहीं? इन के दिल में येही ख़यालात चक्कर लगा रहे थे मगर अल्लाह व रसूल عزوجل وصلى الله تعالى عليه واله وسلم की इताअत से कोई चारा न था, 

🌷लिहाज़ा वोह अस्हाबे सुफ़्फ़ा को बुला कर ले गए येह सब लोग अपनी अपनी जगह एक कितार में बैठ गए फिर आप ﷺ ने हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه को हुक्म दिया कि "तुम खुद ही इन सब लोगों को येह दूध पिलाओ।" चुनान्चे उन्हों ने सब को पिलाना शुरू कर दिया जब सब के सब शिकम सैर पी कर सैराब हो गए तो हुज़ूरे अकरम ﷺ ने अपने दस्ते रहमत में येह प्याला ले लिया और हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه की तरफ देख कर मुस्कुराए और फ़रमाया कि अब सिर्फ हम और तुम बाक़ी रह गए हैं आओ बैठो और तुम पीना शुरू कर दो। उन्हों ने पेट भर दूध पी कर प्याला रखना चाहा तो आप ﷺ ने फ़रमाया कि "और पियो" चुनान्चे उन्हों ने फिर पिया लेकिन आप ﷺ बार बार फ़रमाते रहे कि "और पियो और पियो" यहां तक कि हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه ने अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह (ﷺ)! मुझे उस ज़ात की क़सम है जिस ने आप को हक़ के साथ भेजा है कि अब मेरे पेट में बिल्कुल ही गुन्जाइश नहीं रही। इस के बा'द हुज़ूर ﷺ ने प्याला अपने हाथ में ले लिया और जितना दूध बच गया था आप " बिस्मिल्लाह पढ़ कर पी गए! سبحان الله سبحان الله 🥰

💖 येही वोह मो'जिज़ा है जिस की तरफ इशारा करते हुए आ'ला हज़रत फ़ाज़िले बरेल्वी عَلَيْهِ رَحْمَةُ ने फरमाया कि :

*क्यूं जनाबे बू हुरैरा कैसा था वोह जामे शीर*
*जिस से सत्तर साहिबों का दूध से मुंह फिर गया*

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 795* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 606)
 
> *💫❝शिफ़ाए अमराज़❞*

🌷*आशोबे चश्म से शिफा :* हम ग़ज़्वए खैबर के बयान में मुफ़स्सल तौर पर येह मो'जिज़ा तहरीर कर चुके हैं कि जब आप ﷺ ने फतह का झन्डा अता फरमाने के लिये हज़रते अली رضى الله تعالیٰ عنه को तलब फ़रमाया तो मा'लूम हुवा कि उन की आंखों में आशोब है और मुस्नदे अहमद बिन हम्बल की रिवायत से पता चलता है कि येह आशोबे चश्म इतना सख्त था कि हज़रते सलमह बिन अक्वअ़ رضى الله تعالیٰ عنه उन का हाथ पकड़ कर लाए थे। आप ﷺ ने उन की आंखों में अपना लुआबे दहन लगा दिया और दुआ फ़रमा दी तो वोह फ़ौरन ही शिफ़ायाब हो गए और ऐसा मा'लूम होता था कि उन की आंखों में कभी दर्द था ही नहीं और वोह उसी वक़्त झन्डा ले कर रवाना हो गए और जोशे जिहाद में भरे हुए इनतिहाई जांबाज़ी के साथ जंग की और खैबर का क़लआ़ उन के दस्ते हक़ परस्त से उसी दिन फ़त्ह हो गया। سبحان الله 

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 797* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 607)
 
> *💫❝शिफ़ाए अमराज़❞*

🐍*सांप का ज़हर उतर गया :*  
वाक़िअए हिजरत में हम तफ्सील के साथ लिख चुके हैं कि जब गारे सौर में हज़रते अबू बक्र सिद्दीक رضى الله تعالیٰ عنه के पाउं में सांप ने काट लिया और दर्दो कर्ब की शिद्दत से बेताब हो कर रो पड़े तो आप ﷺ ने उन के ज़ख्म पर अपना लुआबे दहन लगा दिया जिस से फौरन ही दर्द जाता रहा और सांप का ज़हर उतर गया। سبحان الله 

🦴*टूटी हुई टांग दुरुस्त हो गई :* 
बुखारी शरीफ की एक तवील हदीस में मजकूर है कि हज़रते अब्दुल्लाह बिन अतीक رضى الله تعالیٰ عنه जब अबू राफेअ यहूदी को क़त्ल कर के वापस आने लगे तो उस के कोठे के ज़ीने से गिर पड़े जिस से उन की टांग टूट गई और उन के साथी उन को उठा कर बारगाहे नुबुव्वत में लाए, हुज़ूरे अक्दस ﷺ ने उन की ज़बान से अबू राफेअ के क़त्ल का सारा वाकिआ सुना। फिर उन की टूटी हुई टांग पर अपना दस्ते मुबारक फैर दिया तो वोह फौरन ही अच्छी हो गई और येह मा'लूम होने लगा कि उन की टांग में कभी कोई चोट लगी ही न थी। سبحان الله

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 797* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 608)
 
> *💫❝शिफ़ाए अमराज़❞*

⚔️*तलवार का जख्म अच्छा हो गया :* 
ग़ज़्वए खैबर में हज़रते सलमह बिन अक्वअ़ رضى الله تعالیٰ عنه की टांग में तलवार का ज़ख़्म लग गया, वोह फौरन ही बारगाहे नुबुव्वत में हाज़िर हो गए आप ﷺ ने उन के ज़ख्म पर तीन मरतबा दम कर दिया फिर उन्हें दर्द की कोई शिकायत महसूस नहीं हुई सिर्फ ज़ख्म का निशान रह गया था! سبحان الله

👀 *अन्धा, बीना हो गया :* 
हुज़ूरे अक़्दस ﷺ की खिदमते अक़्दस में एक अन्धा हाज़िर हुवा और अपनी तकलीफ़ बयान करने लगा, आप ﷺ ने फ़रमाया कि अगर तुम्हारी ख़्वाहिश हो तो मैं दुआ कर दूं और अगर चाहो तो सब्र करो येही तुम्हारे लिये बेहतर है। उस ने दरख्वास्त की, कि या रसूलल्लाह (ﷺ) ! मेरी बीनाई के लिये दुआ फ़रमा दीजिये। आप ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि तुम अच्छी तरह वुज़ू कर के येह दुआ मांगो कि *“खुदा वन्दा ! अपने रहमते वाले पैग़म्बर के वसीले से मेरी हाजत पूरी कर दे"* तिरमिज़ी और हाकिम की रिवायत में इतना ही मज़्मून है मगर इब्ने हम्बल और हाकिम की दूसरी रिवायत में इस के बाद येह भी है कि उस नाबीना ने ऐसा किया तो फ़ौरन ही अच्छा गया और उस की आंखों पर भरपूर रौशनी आ गई। سبحان الله

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 798* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 609)
 
> *💫❝शिफ़ाए अमराज़❞*

🌷*गूंगा बोलने लगा :* 
हिज्जतुल वदाअ के मौक़अ पर हुज़ूरे अन्वर ﷺ की खिदमत में क़बीलए "ख़सअम" की एक औरत अपने बच्चे को ले कर आई और कहने लगी कि या रसूलल्लाह (ﷺ)! येह मेरा इक्लौता बेटा बोलता नहीं है। आप ﷺ ने पानी तलब फ़रमाया और उस में हाथ धो कर कुल्ली फ़रमा दी और इरशाद फ़रमाया कि येह पानी इस बच्चे को पिला दो और कुछ इस के ऊपर छिड़क दो। दूसरे साल वोह औरत आई तो उस ने लोगों से बयान किया कि उस का लड़का अच्छा हो गया और बोलने लगा। سبحان الله

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 799* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 610)
 
> *💫❝शिफ़ाए अमराज़❞*

🌷*हज़रते क़तादा की आंख :* 
जंगे उहुद में हज़रते क़तादा बिन नोमान رضى الله تعالیٰ عنه की आंख में एक तीर लगा जिस से उन की आंख उन के रुख़्सार पर बह कर आ गई, येह दौड़ कर हुज़ूर रसूले अकरम ﷺ की ख़िदमत में हाज़िर हो गए, आप ﷺ ने फ़ौरन ही अपने दस्ते मुबारक से उनकी बही हुई आंख को आंख के हल्के में रख कर अपना मुक़द्दस हाथ उस पर फैर दिया तो उसी वक़्त उन की आंख अच्छी हो गई और येह आंख उन की दूसरी आंख से ज़ियादा खूब सूरत और रौशन रही। سبحان الله

💚 एक रिवायत में येह भी आया है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि अगर तुम चाहो तो तुम्हारी आंख को तुम्हारे हल्क़ए चश्म में रख दूं और वोह अच्छी हो जाए और अगर तुम चाहो तो सब्र करो और तुम्हें इस के बदले पर जन्नत मिलेगी। उन्हों ने अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह (ﷺ) ! जन्नत बिला शुबा बहुत ही बड़ी ने'मत है मगर मुझे काना होना बहुत बुरा मा'लूम होता है इस लिये आप मेरी आंख अच्छी कर दीजिये और मेरे लिये जन्नत की दुआ भी फ़रमा दीजिये। हुज़ूर रहमतुल्लिल आलमीन ﷺ को अपने इस जां निसार पर प्यार आ गया और आप ﷺ ने उन की आंख को हल्क़ए चश्म में रख कर हाथ फैर दिया तो उन की आंख भी अच्छी हो गई और उन के लिये जन्नती होने की दुआ भी फ़रमा दी और येह दोनों ने'मतों से सरफ़राज़ हो गए। سبحان الله

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 800* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 611)
 
> *💫❝शिफ़ाए अमराज़❞*

🌷*फाएदा :*  
येह मो'जिज़ा बहुत ही मश्हूर है और हज़रते क़तादा बिन नो'मान رضى الله تعالیٰ عنه की औलाद में हमेशा इस बात का तफ़ाखुर रहा कि इन के जद्दे आ'ला की आंख रसूलुल्लाह ﷺ के दस्ते मुबारक की बरकत से अच्छी हो गई। चुनान्चे हज़रते क़तादा बिन नो'मान के पोते हज़रते आसिम رضى الله تعالیٰ عنه जब ख़लीफ़ए आदिल हज़रते उ़मर बिन अब्दुल अज़ीज़ رضى الله تعالیٰ عنه के दरबारे ख़िलाफ़त में पहुंचे तो उन्हों ने अपना तआरुफ़ कराते हुए अपना येह क़त्आ पढ़ा कि :

اَنَا ابْنُ الَّذِىْ سَالَتْ عَلَى الْخَدِّ عَيْنُهٗ  
فَرُدَّتْ بِكَفِّ الْمُصْطَفٰى اَحْسَنَ الرَّدّٖ 
 فَعَادَتْ كَمَا كَانَتْ لِاَوَّلِ اَمْرِهَا
 فَيَا حُسْنَ مَا عَيْنٍ وَّ يَا حُسْنَ مَا رَدّٖ

💖 (या'नी) मैं उस शख़्स का बेटा हूं कि जिस की आंख उसके रुख़्सार पर बह आई थी तो हज़रते मुस्तफ़ा ﷺ की हथेली से वोह अपनी जगह पर क्या ही अच्छी तरह से रख दी गई तो फिर वोह जैसी पहले थी वैसी ही हो गई तो क्या ही अच्छी वोह आंख थी और क्या ही अच्छा हुज़ूर ﷺ का उस आंख को उस की जगह रखना था।

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 800* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 612)
 
> *💫❝शिफ़ाए अमराज़❞*

🌷*क़ै में काला पिल्ला गिरा :* 
एक औरत अपने बेटे को ले कर हुज़ूर रिसालत मआब ﷺ के पास आई और अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह (ﷺ)! मेरे इस बच्चे पर सुबह व शाम जुनून का दौरा पड़ता है। आप ﷺ ने उस बच्चे के सीने पर अपना दस्ते रहमत फैर दिया और दुआ दी तो उस बच्चे को एक ज़ोरदार कै हुई और एक काले रंग का (कुत्ते का) पिल्ला क़ै में गिरा जो दौड़ता फिर रहा था और बच्चा शिफ़ायाब हो गया। 

🪷 *जुनून अच्छा हो गया :*  
हज़रते या'ला बिन मुर्रह رضى الله تعالیٰ عنه का बयान है कि मैंने एक सफ़र में रसूलुल्लाह ﷺ के तीन मो'जिज़ात देखे। पहला मो'जिज़ा येह कि एक ऊंट को देखा कि उस ने बिलबिला कर अपनी गरदन आप के सामने डाल दी। आप ﷺ ने उस ऊंट के मालिक को बुलाया और उस से फ़रमाया कि इस ऊंट ने काम की ज़ियादती और खुराक की कमी का मुझ से शिक्वा किया है इस के साथ अच्छा सुलूक करते रहो।

🌷दूसरा मो'जिज़ा यह कि एक मन्जिल में आप सो रहे थे तो मैं ने देखा कि एक दरख़्त चल कर आया और आप को ढांप लिया फिर लौट कर अपनी जगह पर चला गया। जब आप बेदार हुए और मैं ने आप से इस का ज़िक्र किया तो आप ﷺ ने फ़रमाया कि इस दरख़्त ने अपने रब से इजाज़त तलब की थी कि वोह मुझे सलाम करे तो खुदा ने इस को इजाज़त दे दी और वोह मेरे सलाम के लिये आया था।

🪷 तीसरा मो'जिज़ा येह कि एक औरत अपने बच्चे को लेकर आई जो जुनून का मरीज़ था तो नबी ﷺ ने उस बच्चे के नथने को पकड़ कर फ़रमाया कि "निकल जा क्यूं कि मैं मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह हूं" फिर हम वहां से चल पड़े और जब वापसी में हम उस जगह पहुंचे और आप ﷺ ने उस औरत से उस के बच्चे के बारे में दरयाप्त फ़रमाया तो उस ने कहा कि उस जात की क़सम जिस ने आप को हक़ के साथ भेजा है कि आप के तशरीफ़ ले जाने के बाद से इस बच्चे को कोई तक्लीफ़ होते हुए हम ने नहीं देखा। سبحان الله 

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 801* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 613)
 
> *💫❝शिफ़ाए अमराज़❞*

🌷*जला हुवा बच्चा अच्छा हो गया :* 
मुहम्मद बिन हातिब رضى الله تعالیٰ عنه एक सहाबी हैं येह बचपन में अपनी मां की गोद से आग में गिर पड़े और कुछ जल गए, इन की मां इन को ले कर ख़िदमते अक़्दस में आई तो आप ﷺ ने अपना लुआबे दहन इन पर मल कर दुआ फ़रमा दी। मुहम्मद बिन हातिब رضى الله تعالیٰ عنه की मां कहती थीं कि मैं बच्चे को ले कर वहां से उठने भी नहीं पाई थी कि बच्चे का ज़ख़्म बिल्कुल ही अच्छा हो गया। سبحان الله

💖 *मरज़े निस्यान दूर हो गया :* 
तग़य्युरे अल्फ़ाज़ और चन्द जुम्लों की कमी बेशी के साथ बुखारी शरीफ़ की मुतअद्दद रिवायतों में इस मो'जिज़े का ज़िक्र है कि हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه ने अपने हाफ़िज़े की कमज़ोरी की शिकायत की तो हुज़ूर ﷺ ने उन से फ़रमाया कि अपनी चादर फैलाओ। उन्हों ने फैलाया, आप ﷺ ने अपना दस्ते मुबारक उस चादर पर डाला फिर फ़रमाया कि अब इस को समेट लो। हज़रते अबू हुरैरा رضى الله تعالیٰ عنه कहते हैं कि मैं ने ऐसा ही किया इस के बाद से फिर मैं कोई बात नहीं भूला। سبحان الله

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 802* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 614)
 
> *💫❝शिफ़ाए अमराज़❞*

🌷*मक़्बूलिय्यते दुआ :*
येह हम पहले तहरीर कर चुके हैं कि हज़राते अम्बिया علیهم السلام की दुआओं से बिल्कुल ना गहां आदते जारिया के ख़िलाफ़ किसी गैर मुतवक़्क़ेअ बात का ज़ाहिर हो जाना इस का भी मो'जिज़ात ही में शुमार है। इसी लिये अल्लाह तआला हज़राते अम्बिया علیهم السلام की दुआओं से बड़ी बड़ी मुश्किलात को हल फ़रमा देता है और क़िस्म किस्म की बलाएं टल जाती हैं और बहुत सी गैर मुतवक़्क़ेअ चीजें जुहूर में आ जाती हैं।

💚 चुनान्चे हुज़ूर खातमुन्नबिय्यीन ﷺ के मोजिज़ात में से आप की दुआओं की मक़्बूलिय्यत भी है कि आप ﷺ ने जब भी मुश्किलात या त़लबे हाजात के वक़्त खुदा की इमदादे ग़ैबी का सहारा ढूंढते हुए दुआएं मांगीं तो हर मौक़अ पर हक़ तआला ने आप की दुआओं के लिये मक़्बूलिय्यत का दरवाज़ा खोल दिया और आप की दुआओं से ऐसी ऐसी खिलाफ़े उम्मीद और गैर मुतवक़्क़ेअ चीजें आलमे वुजूद में आ गई कि जिन को मो'जिज़ात के सिवा कुछ नहीं कहा जा सकता, उन में से चन्द मोजिज़ात का तज़किरा हस्बे ज़ैल है।

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 803* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 615)
 
> *💫❝शिफ़ाए अमराज़❞*

🌷*कुरैश पर कहत का अज़ाब :* 
जब कुफ़्फ़ारे कुरैश हुज़ूरे अक़्दस ﷺ और आप के असहाब رضى الله تعالیٰ عنهم पर बे पनाह मज़ालिम ढाने लगे जो ज़ब्त व बरदाश्त से बाहर थे तो आप ने उन शरीरों की सरकशी का इलाज करने के लिये उन लोगों के हक़ में कहत की दुआ फ़रमा दी। चुनान्चे अल्लाह तआला ने उन लोगों पर कहत का ऐसा अज़ाबे शदीद भेजा कि अहले मक्का सख़्त मुसीबत में मुब्तला हो गए यहां तक कि भूक से बेताब हो कर मुर्दार जानवरों की हड्डियां और सूखे चमड़े उबाल उबाल कर खाने लगे। बिल आखिर इस के सिवा कोई चारा नज़र न आया कि रहमतुल्लिल आलमीन ﷺ की बारगाहे रहमत का दरवाज़ा खट खटाएं और उन के हुज़ूर में अपनी फरयाद पेश करें। 

💚 चुनान्चे अबू सुफ्यान ब हालते कुफ्र चन्द रुअसाए कुरैश को साथ ले कर आप के आस्तानए रहमत पर हाज़िर हुए और गिड़गिड़ा कर कहने लगे कि ऐ मुहम्मद ! (ﷺ) तुम्हारी क़ौम बरबाद हो गई, ख़ुदा से दुआ करो कि येह क़ह़त़ का अज़ाब टल जाए। आप ﷺ को उन लोगों की बेक़रारी और गिर्या व ज़ारी पर रहम आ गया। चुनान्चे आप ने दुआ के लिये हाथ उठाए फ़ौरन ही आप की दुआ मक़्बूल हुई और इस क़दर ज़ोरदार बारिश हुई कि सारा अरब सैराब हो गया और अहले मक्का को क़ह़त़ के अज़ाब से नजात मिली। 

*📙 किताब : सीरते मुस्तफ़ा ﷺ सफ़ह 804* 
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सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part-3)

सीरते मुस्तफ़ा ﷺ (Part- 584) > *💫❝आ़लमे नबातात के मो'जिज़ात❞* 🌷*ख़ोशा दरख़्त से उतर पड़ा :* हज़रते अब्दुल्लाह बिन अब्बास رضى الله ت...